मेरे द्वारे फागुन आया ****************** फूली सरसों, खेत मुस्काया मेरे द्वारे फागुन आया। धरणी ने ओढ़ी धानी चुनरिया आम्र-पल्लव बौराया। मेरे द्वारे..... कोयल ने छेड़ी मधुर तान स्वर संगम लहराया। मेरे द्वारे ...... बैसाखी की दस्तक देने जब बसन्त स्वयं आया। मेरे द्वारे....... पड़ी चंग पर थाप जब देखो भंग का रंग चढ़ आया। मेरे द्वारे...... खिला गोरी का अंग-अंग, जब साजन ने प्यार का रंग लगाया। मेरे द्वारे...... रंगों के लगे अंबार है देखो त्यौंहार होली का आया। मस्ती, प्यार, मनुहार के संग खुशियां झोली भर कर लाया। मेरे द्वारे फागुन आया।। - सरिता सुराणा 10.03.2020
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वर्तमान संदर्भों में स्त्री स्वतंत्रता के बदलते मायने', स्त्री स्वतंत्र हो किससे?
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https://shabdpravah.page/article/vartamaan-sandarbhon-mein-stree-svatantrata-ke-badalate-maayane-stree-svatantr-ho-kisase-/VFyBFU.html वर्तमान संदर्भों में स्त्री स्वतंत्रता के बदलते मायने स्त्री स्वतंत्र हो किससे ? March 7, 2020 • सरिता सुराणा • लेख - सरिता सुराणा 1960 के दशक से जबसे 'नारी मुक्ति आंदोलन' शुरू हुआ था, तब से ही जब-तब स्त्री स्वतंत्रता की बात बड़े जोर-शोर से उठाई जाती है। खासकर महिला दिवस के अवसर पर विभिन्न महिला संगठनों द्वारा इस विषय पर अनेक सेमिनार आयोजित किए जाते हैं और उनमें चर्चा का विषय आमतौर पर यही होता है- स्त्री की स्वतंत्रता। प्रश्न उठता है कि इस स्त्री स्वतंत्रता का अभिप्राय क्या है? दैहिक स्वतंत्रता, मानसिक स्वतंत्रता या फिर सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता? एक स्त्री किस तरह की स्वतंत्रता चाहती है और क्यों? यह तो सर्वविदित तथ्य है कि हमारा भारतीय समाज पुरुष प्रधान समाज रहा है, जहां आज भी स्त्रियों की स्थिति उतनी सुदृढ़ नहीं है, जितनी अन्य विकसित देशों में है। आज़ अगर महिलाएं पढ़-लिखकर अपने बलबूते पर आगे आ भी रही हैं त...
स्त्री स्वतंत्र हो किससे? अपने आप से, परिवार से या समाज से
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स्त्री स्वतंत्र हो किससे? अपने आप से, परिवार से या समाज से 7 Mar, 2020 20:58 IST | Sakshi ऑफिस और मातृत्व की जिम्मेदारी तथा अपने कार्य के प्रति समर्पित महिलाएं आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। इस दिवस के पीछे बहुत बड़ा इतिहास है। साल 1960 के दशक से जबसे 'नारी मुक्ति आंदोलन' शुरू हुआ था, तब से ही जब-तब स्त्री स्वतंत्रता की बात बड़े जोर-शोर से उठाई जाती है। खासकर महिला दिवस के अवसर पर विभिन्न महिला संगठनों द्वारा इस विषय पर अनेक सेमिनार आयोजित किए जाते हैं और उनमें चर्चा का विषय आमतौर पर यही होता है- स्त्री की स्वतंत्रता। प्रश्न उठता है कि इस स्त्री स्वतंत्रता का अभिप्राय क्या है? दैहिक स्वतंत्रता, मानसिक स्वतंत्रता या फिर सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता? एक स्त्री किस तरह की स्वतंत्रता चाहती है और क्यों? पुरुष प्रधान समाज यह तो सर्वविदित तथ्य है कि हमारा भारतीय समाज पुरुष प्रधान समाज रहा है, जहां आज भी स्त्रियों की स्थिति उतनी सुदृढ़ नहीं है, जितनी अन्य विकसित देशों में है। आज़ अगर महिलाएं पढ़-लिखकर अपने बलबूते पर आगे आ भी रही हैं तो भी वहां ...
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर दैनिक नवीन कदम समाचार पत्र समूह द्वारा 'सरोजिनी नायुडू सम्मान' की घोषणा
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च 2020 को सम्मानित होंगी "नवीन क़दम समूह" की सम्माननीय महिला कोऑर्डिनेटर्स, संबंधित राज्यों की महान विभूतियों के नाम पर प्रदान किया जाएगा सम्मान, नारी सशक्तिकरण की दिशा में "नवीन क़दम समूह" की पहल.. राज्यवार कोआर्डिनेटर एवं सम्मान का नाम 1. श्रीमती सरिता सुराणा जी (तेलंगाना) : सरोजनी नायडू सम्मान 2. श्रीमती पुष्पा सहाय जी (झारखंड) : चामी मुर्मू सम्मान 3. श्रीमती दीपमाला पांडेय जी (छत्तीसगढ़) : मिनिमाता सम्मान 4. श्रीमती सीमा मिश्रा जी (मध्यप्रदेश) : रानी दुर्गावती सम्मान 5. श्रीमती संगीता के. जी (गुजरात) : कस्तूरबा गांधी सम्मान 6. श्रीमती इन्दु तोदी जी (नेपाल) : महादेवी वर्मा सम्मान 7. श्रीमती रूबी प्रसाद जी (पश्चिम बंगाल) : महाश्वेता देवी सम्मान 8. श्रीमती रिंकी सिन्हा जी (बिहार) : शारदा सिन्हा सम्मान सभी सम्माननीय कोऑर्डिनेटर्स को "नवीन क़दम समूह" की ओर से हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की अनंत शुभकामनाएं... 💐💐💐 सादर राजेन्द्र राठौड़ स्थानीय संपादक नवीन क़दम समूह, छत्तीसगढ़ 06.03.2020...
'सूत्रधार' ग्रुप द्वारा आयोजित महिला दिवस पर परिचर्चा
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : धनबाद रेलवे मण्डल महिला के हवाले, पढ़कर रह जाएंगे दंग राष्ट्रीय Today, about 1 hour ago फेसबुक पर शेयर करें Share On Twiter गूगल+ पर शेयर करें लिंक्डइन पर शेयर करें वाट्सएप्प पर शेयर करें 0 Comments धनबाद/हैदराबाद : प्रतिवर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इसके दो दिन पहले ही धनबाद रेलवे मण्डल में महिला सशक्तिकरण का बेजोड़ दृश्य देखने को मिल रहा है। भारतीय रेलवे को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले पांच रेल मंडलों में शुमार धनबाद रेल मंडल के रेलवे स्टेशन को अब महिलाओं के हवाले कर दिया गया है। ये महिलाएं अब यात्रियों की टिकटें काट रही हैं। कंट्रोल रूम में बैठकर रेलगाड़ियों के परिचालन को नियंत्रित कर रही हैं। टिकट चेकिंग के साथ-साथ सुरक्षा का जिम्मा भी संभाल रही हैं। कंट्रोल रूम धनबाद रेल मंडल इस बार अनूठे अंदाज में महिला दिवस मना रहा है। एक तरह से यह महिलाओं के प्रति उसका सम्मान है और साथ ही साथ उनकी काबिलियत की स्वीकार्यता भी है। धनबाद रेलवे स्टेशन का नजारा बदल गया है। अंतरराष्ट्रीय महिला सप्ताह पर यहां...
'प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से सभी विषयों का अध्ययन और अध्यापन संभव' संगोष्ठी सम्पन्न
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‘प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से सभी विषयों का अध्ययन और अध्यापन सम्भव’ संगोष्ठी संपन्न तेलंगाना Yesterday, 7:26 pm फेसबुक पर शेयर करें Share On Twiter गूगल+ पर शेयर करें लिंक्डइन पर शेयर करें वाट्सएप्प पर शेयर करें 0 Comments हैदराबाद : 'प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से सभी विषयों का अध्ययन और अध्यापन संभव है।' विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह गोष्ठी भक्ति साहित्य और सांस्कृतिक अध्ययन शोध संस्थान तुलसी भवन उस्मानिया यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर प्रो प्रदीप कुमार के नेतृत्व में ओयू गेस्ट हाउस के आईसीएसएसआर हॉल में आयोजित किया गया।ि कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन करके किया गया। तत्पश्चात डॉ एच के वंदना ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। सेमिनार डायरेक्टर प्रो प्रदीप कुमार ने सभी अतिथियों तथा प्रपत्र प्रस्तुतकर्ताओं का परिचय प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि थे- ओयू के कला संकाय के डीन प्रो ए करुणाकर, आईसीएसएसआर सदर्न डायरेक्टर प्रो. वी ऊषा किरण, अंग्रेजी विभाग अध्यक्ष प्रो मुरली कृष्णा। विशेष अतिथियो...