'गरीबों की सुनो वो तुम्हारी सुनेंगे तुम एक पैसा दोगे वो दस लाख देगा।' इस सिद्धांत को अपने जीवन में शत-प्रतिशत जीने वाले डॉ.अच्युत सामंत आज़ के केबीसी एपिसोड में कर्मवीर के रूप में सम्मिलित हुए। बेहद कठिन परिस्थितियों में ग़रीबी और भुखमरी से संघर्ष करते हुए आज उन्होंने KISS and KIIT जैसे विश्वविद्यालयों की स्थापना की है। उनमें 60000 गरीब आदिवासी बच्चों को वे निशुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। धन्य हैं ऐसे कर्मवीर जिन्होंने इतनी अभावग्रस्त ज़िन्दगी जीकर आदिवासी बच्चों के कल्याण हेतु ऐसी संस्थाओं की स्थापना की। दु:ख होता है ये जानकर कि सरकारें इनकी संस्था में वित्तीय जांच के लिए तो पहुंच जाती हैं लेकिन अपनी तरफ से किसी भी तरह की कोई मदद नहीं करतीं। जो असली 'भारत रत्न' हैं, उन्हें भारत रत्न तो क्या, पद्मश्री और पद्मभूषण अवॉर्ड से भी नहीं नवाजा जाता। विदेशी विश्वविद्यालयों से प्राप्त श्री सामंत के अवाॅर्ड इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं कि हम अपने असली समाजसेवकों और भविष्य निर्माताओं की कितनी कद्र करते हैं। सलाम है ऐसे कर्मवीर को और ईश्वर से ये प्रार्थना भी कि वे उ...
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छंदबद्ध रचनाओं में मात्राभार की गणना
छंदबद्ध रचना में मात्राभार की गणना ***************************** छंदबद्ध रचना के लिये मात्राभार की गणना का ज्ञान आवश्यक है। मात्राभार दो प्रकार का होता है– वर्णिक भार और वाचिक भार। वर्णिक भार में प्रत्येक वर्ण का भार अलग-अलग यथावत लिया जाता है जैसे– विकल का वर्णिक भार = 111 या ललल जबकि वाचिक भार में उच्चारण के अनुरूप वर्णों को मिलाकर भार की गणना की जाती है जैसे विकल का उच्चारण वि कल है, विक ल नहीं, इसलिए विकल का वाचिक भार है – 12 या लगा। वर्णिक भार की गणना करने के लिए कुछ निश्चित नियम हैं। वर्णिक भार की गणना (1) ह्रस्व स्वरों की मात्रा 1 होती है जिसे लघु कहते हैं, जैसे - अ, इ, उ, ऋ की मात्रा 1 है। लघु को 1 या । या ल से व्यक्त किया जाता है। (2) दीर्घ स्वरों की मात्रा 2 होती है जिसे गुरु कहते हैं, जैसे-आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ की मात्रा 2 है। गुरु को 2 या S या गा से व्यक्त किया जाता है। (3) व्यंजनों की मात्रा 1 होती है , जैसे -क,ख,ग,घ / च,छ,ज,झ / ट,ठ,ड,ढ,ण / त,थ,द,ध,न / प,फ,ब,भ,म /य,र,ल,व,श,ष,स,ह। वास्तव में व्यंजन का उच्चारण स्वर के साथ ही संभव है, इसलिए उसी रूप में यहाँ लिखा गया है। अन...

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