पुस्तक समीक्षा: 'जीना इसी का नाम है'
मानवीय मूल्यों, उच्च आदर्शों और राष्ट्रीयता का जीवंत दस्तावेज है- 'जीना इसी का नाम है' February 24, 2020 • सरिता सुराणा • समीक्षा/पुस्तक चर्चा पुस्तक: जीना इसी का नाम है लेखक: राजकुमार जैन राजन प्रकाशक: अयन प्रकाशन, 1/20, महरौली, नई दिल्ली- 110030 संस्करण: 2020 मूल्य: 200/- (सजिल्द) 'जीना इसी का नाम है' राजकुमार जैन राजन का सद्य: प्रकाशित आलेख-संग्रह है। जैसा कि लेखक ने स्पष्ट किया है कि ये आलेख पिछले 30 वर्षों के कालखंड में अलग-अलग समय और अवसरों पर विभिन्न पत्रिकाओं का संपादकीय दायित्व निभाते हुए लिखे गए हैं, वे पुस्तकाकार में आज हमारे सामने हैं। राजन बाल साहित्यकार के रूप में भी जाने जाते हैं, लेकिन इस आलेख संग्रह को पढ़ने से उनका एक नया रूप हमारे समक्ष प्रकट होता है और वह है एक निबन्धकार का रूप, जो धीर है, गम्भीर है और समाज में घटित होने वाली घटनाओं के प्रति सजग भी है। राजन का दृष्टिकोण साफ एवं शीशे की तरह पारदर्शी है, उनकी सोच सकारात्मक है। अपने आत्मकथ्य में वे कहते हैं- ' जीवन की सुन्दरता इतनी सुन्दर वह आकर्षक नहीं है। सब कुछ हमारी...