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हिन्दी साहित्य के उत्थान में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का योगदान' विषय पर परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी सम्पन्न

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  https://paramparaparivar.blogspot.com/2021/06/blog-post_29.html  'हिन्दी साहित्य के उत्थान में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का योगदान'                 विषय पर परिचर्चा गोष्ठी सम्पन्न हैदराबाद। सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, भारत द्वारा गत दिनों 14वीं परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया। संस्थापिका सरिता सुराणा ने मां शारदे का स्मरण करते हुए गोष्ठी में पधारे हुए सभी सम्मानित साहित्यकारों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया। सर्वप्रथम उन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता करने हेतु अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि एवं साहित्यकार दम्पत्ति श्री राजेन्द्र निगम राज और इन्दु राज निगम को मंच पर आमंत्रित किया। तत्पश्चात् वरिष्ठ कवि एवं नाटककार सुहास भटनागर, प्रपत्र प्रस्तुतकर्ता सुनीता लुल्ला और रिमझिम झा को मंच पर आमंत्रित किया। ज्योति नारायण की स्वरचित सरस्वती वन्दना से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। उसके बाद गत दिनों शहर के वरिष्ठ कवि नेहपाल सिंह जी वर्मा के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अपने स्वागत भा...

विश्व पर्यावरण दिवस पर मेरी एक रचना- आओ पेड़ लगाएं, पर्यावरण बचाएं

 विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, भारत के फेसबुक पटल पर आयोजित   'चित्र शृंखला-19- आओ पेड़ लगाएं' के अन्तर्गत मेरी रचना- आओ पेड़ लगाएं, पर्यावरण बचाएं ***************************** आओ सब मिल वृक्ष लगाएं धरती मां का संताप मिटाएं। दूषित वातावरण को शुद्ध करने असली ऑक्सीजन प्लाण्ट लगाएं। आओ सब मिल वृक्ष लगाएं।। विषैली हवाओं से बढ़ रहा प्रदूषण जल-जमीन का हम करें संरक्षण। जीना है यदि प्रसन्न-स्वस्थ रहकर शुद्ध रहे आस-पास का वातावरण। खुलकर सब जीव सांस ले पाएं। आओ सब मिल वृक्ष लगाएं।। वाहनों का प्रयोग सीमित करके साइकिल का उपयोग करें घर में एसी-कूलर का हम कम से कम प्रयोग करें। संयमित जीवन-शैली अपनाएं। आओ सब मिल वृक्ष लगाएं।। प्लास्टिक को कहें अलविदा कपड़े के थैले लेकर जाएं रोजमर्रा के कामों में अब प्राकृतिक चीजों को अपनाएं। प्रकृति के साथ करें मित्रता रोज पर्यावरण दिवस मनाएं। जीओ और जीने दो का सिद्धान्त व्यावहारिक जीवन में अपनाएं।। आओ सब मिल वृक्ष लगाएं। धरती मां का संताप मिटाएं।। - सरिता सुराणा 05.06.2021 https://m.facebook.com/story.ph...

अनेकान्त के आराधक भगवान महावीर की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं

 *अनेकान्त के आराधक *भगवान महावीर की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं -सरिता सुराणा,हैदराबाद – युवा प्रवर्तक** https://yuvapravartak.com/?p=50886 युवा प्रवर्तक में प्रकाशित आलेख। डेली शुभ लाभ में प्रकाशित आलेख। https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1419303331738168&id=100009755447698 इन्दौर से प्रकाशित होने वाले दैनिक अवन्तिका में प्रकाशित आलेख। https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1419302611738240&id=100009755447698

भगवान महावीर जयन्ती पर विशेष आलेख

 महावीर जयन्ती पर विशेष लेख ------------------------------------------  अनेकान्त के आराधक परम तपस्वी भगवान महावीर की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं ---------------------------------------------------------------------- जन्म कल्याणक *************** 'अहिंसा परमो धर्म:', 'जीओ और जीने दो' तथा 'सच्चं भयवं' का संदेश देने वाले, राग-द्वैष विजेता, 8 कर्मों को क्षय करके केवल ज्ञान प्राप्त करने वाले कलिकाल सर्वज्ञ वीतराग वर्धमान भगवान महावीर का जन्म क्षत्रिय कुण्डपुर ग्राम में महाराज सिद्धार्थ के राजमहल में चैत्र शुक्ला त्रयोदशी के दिन महारानी त्रिशला देवी की रत्न कुक्षी से हुआ। महावीर के जन्म के तुरन्त बाद सौधर्म इन्द्रादि देवों ने सुमेरु पर्वत पर भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया। भगवान  महावीर का जीव सोलह स्वप्नों के साथ जब माता त्रिशला के गर्भ में आया, तब से ही राज्य में धन-धान्य और ऐश्वर्य में निरन्तर वृद्धि हुई इसीलिए उनका नाम 'वर्धमान' रखा गया। जन्म से ही भगवान श्रीवत्स आदि 1008 उत्तम लक्षणों से विभूषित थे और उनके साथ दस अतिशय प्रकट हो गए थे। ऐसे अनेक प्रसंग...

युवा प्रवर्तक में प्रकाशित मासिक गोष्ठी की रिपोर्ट

 *सूत्रधार साहित्यिक संस्था द्वारा भद्राचलम क्षेत्र पर परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी सम्पन्न – युवा प्रवर्तक* https://yuvapravartak.com/?p=50922

सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था भारत की 12वीं मासिक गोष्ठी सम्पन्न

 https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1421806214821213&id=100009755447698 डेली शुभ लाभ में प्रकाशित रिपोर्ट।

भद्राचलम क्षेत्र के महत्व पर परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन

 https://abhayindia.com/discussion-and-poetry-seminar-held-on-bhadrachalam-by-sutradhar-literary-society/ हैदराबाद abhayindia.com  सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, भारत की 12वीं मासिक गोष्ठी का आयोजन दिनांक: 25.04.2021 को अपराह्न 12:15 बजे से गूगल मीट के माध्यम से किया गया। मां शारदे का स्मरण करते हुए संस्थापिका सरिता सुराणा ने गोष्ठी प्रारम्भ की। तत्पश्चात् पधारे हुए सभी साहित्यकारों का स्वागत किया। नगर के जाने-माने कवि, नाटककार और निर्देशक सुहास भटनागर ने इस गोष्ठी की अध्यक्षता की। राजस्थान के प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार गोविन्द भारद्वाज ने मुख्य अतिथि की भूमिका निभाई। कार्यक्रम का शुभारम्भ ज्योति नारायण द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। उसके बाद नगर के वरिष्ठ कवि एवं गीतकार दुलीचन्द जी शशि एवं नरेन्द्र कोहली जी को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। यह गोष्ठी दो सत्रों में आयोजित की गई। प्रथम सत्र की शुरुआत करते हुए ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भद्राचलम मंदिर की स्थापना के बारे में जानकारी देते हुए सरिता सुराणा ने कहा कि वनवासियों में यह कहानी प्रचलित है कि दम्...