नवरात्रि में कन्या पूजन की सार्थकता लेख*सरिता सुराणा admin October 17, 2020 11:10 pm लेख सुनने के लिए दबाएं नवरात्रि पर्व मां दुर्गा की आराधना का पर्व है। इन नौ दिनों में माता के नौ रूपों की पूजा की जाती है। वे हैं- मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। इन नौ शक्तियों के मिलन को ही नवरात्रि कहते हैं। इन दिनों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि के लिए संयम की साधना करते हैं, उपवास रखते हैं, भजन, पूजन और योग साधना भी करते हैं। कहा जाता है कि इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन और कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए। वैसे तो हमारे देश में कन्या पूजन सदियों से चला आ रहा है लेकिन क्या एक दिन कन्या पूजन करने के बाद नारी जाति के प्रति पुरुष वर्ग के कर्त्तव्य और भावनाएं समाप्त हो जाती हैं और दूसरे दिन ही वे उसके लिए राक्षस बन उसे नोंचकर खाने और फिर जिन्दा जलाने में तनिक भी संकोच नहीं करते। क्या यही है कन्या पूजन की सार्थकता? आज देश में जो भयावह स़्थितियां बनी हुई है, उन्हें देखकर क्या हम ...