क्या हैदराबाद पुलिस द्वारा किया गया एनकाउंटर समय की मांग था?
Get link
Facebook
X
Pinterest
Email
Other Apps
आज़ सुबह से ही पूरे देश में जश्न का माहौल है और तेलंगाना पुलिस की वाहवाही हो रही है। हो भी क्यों न, पुलिस ने काम ही ऐसा किया है। दिशा हत्याकांड के आरोपी पुलिस की कस्टडी में थे और जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस आज़ उन्हें घटनास्थल पर लेकर गई थी।
आज़ सुबह से ही पूरे देश में जश्न का माहौल है और तेलंगाना पुलिस की वाहवाही हो रही है। हो भी क्यों न, पुलिस ने काम ही ऐसा किया है। दिशा हत्याकांड के आरोपी पुलिस की कस्टडी में थे और जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस आज़ उन्हें घटनास्थल पर लेकर गई थी। जहां उन्होंने पुलिस को चकमा देकर भागने की कोशिश की। उनके हथियार छीनकर उन पर वार करने की कोशिश की। और परिणामस्वरूप पुलिस फायरिंग में चारों अपराधी मारे गए।
जय-जयकार
इस पूरे मामले में देखा जाए तो कई बातें निकल कर सामने आती है। पहली तो ये कि पूरे देश में आज़ हैदराबाद पुलिस की जय-जयकार हो रही है। लोग त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस को शाबाशी दे रहे हैं। लेकिन अगर यही फुर्ती पुलिस ने उस दिन दिखलाई होती, जिस दिन इन दरिंदो ने दिशा को किडनैप करके उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और बाद में उसे निर्दयतापूर्वक जिन्दा जला दिया तो दिशा आज़ जिन्दा होती और हमारे बीच होती।
मौके पर पुलिस और लोग
इंसाफ
खैर, बीते हुए समय को तो लौटाया नहीं जा सकता, लेकिन अब पुलिस द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई से कम से कम दिशा के परिवार वालों को थोड़ा ही सही सुकून मिला होगा अन्यथा वे भी निर्भया के माता-पिता की तरह इंसाफ के लिए सालों भटकते रहते और हर दिन एक नई मौत मरते।
जहां पूरा देश हैदराबाद पुलिस को शाबाशी दे रहा है, वहीं कुछ लोग पुलिस के एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं। उनसे देश की जनता यह पूछना चाहती है कि वे लोग तब कहां गए थे, जब ये दरिंदे सहायता देने के नाम पर एक मासूम लड़की को उठाकर ले गए और बाद में उसकी वो दुर्दशा की कि जिसे देखकर हैवान भी कांप जाए। क्या गलती थी उसकी, यही कि वो एक औरत थी, असहाय थी, जो उनकी कुत्सित मनोवृत्ति को भांप नहीं पाई और उन पर विश्वास कर लिया और बदले में मिली नृशंस तरीके से जलाकर दी गई मौत।
नेतागण
कुछ नेतागण तो यहां तक कह रहे हैं कि यह आरोपियों के साथ न्याय नहीं है। सही तो तब होता, जब न्यायिक प्रक्रिया अपनाकर उन्हें सजा दी जाती। ऐसा कहने वालों को क्या ये नहीं पता कि हमारी न्यायिक प्रक्रिया कितनी जटिल और लम्बे समय तक चलने वाली है क्या निर्भया को अब तक न्याय मिला? और न जाने ऐसी और कितनी निर्भया रोज़ ऐसे दरिंदों की दरिंदगी का शिकार होती हैं? जब तक इन शैतानों में मौत का भय नहीं होगा, तब तक ये अपराधी जमानत पर रिहा होकर बेखौफ घूमते रहेंगे और फिर उन्नाव जैसे केसों की पुनरावृत्ति होती रहेगी।
केस शीशे की तरह साफ
मेरा मानना है कि न तो पुलिस और न ही जनता को हमेशा ऐसे एनकाउंटर करने चाहिए। लेकिन जहां पर केस शीशे की तरह साफ हो, वकील भी जिनके पक्ष में पैरवी करने को तैयार नहीं हों, वहां जनता का भरोसा कायम रखने के लिए त्वरित कार्रवाई करना आवश्यक है।
- सरिता सुराणा वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखिका हैदराबाद की कलम से...
Get link
Facebook
X
Pinterest
Email
Other Apps
Comments
Popular posts from this blog
'गरीबों की सुनो वो तुम्हारी सुनेंगे तुम एक पैसा दोगे वो दस लाख देगा।' इस सिद्धांत को अपने जीवन में शत-प्रतिशत जीने वाले डॉ.अच्युत सामंत आज़ के केबीसी एपिसोड में कर्मवीर के रूप में सम्मिलित हुए। बेहद कठिन परिस्थितियों में ग़रीबी और भुखमरी से संघर्ष करते हुए आज उन्होंने KISS and KIIT जैसे विश्वविद्यालयों की स्थापना की है। उनमें 60000 गरीब आदिवासी बच्चों को वे निशुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। धन्य हैं ऐसे कर्मवीर जिन्होंने इतनी अभावग्रस्त ज़िन्दगी जीकर आदिवासी बच्चों के कल्याण हेतु ऐसी संस्थाओं की स्थापना की। दु:ख होता है ये जानकर कि सरकारें इनकी संस्था में वित्तीय जांच के लिए तो पहुंच जाती हैं लेकिन अपनी तरफ से किसी भी तरह की कोई मदद नहीं करतीं। जो असली 'भारत रत्न' हैं, उन्हें भारत रत्न तो क्या, पद्मश्री और पद्मभूषण अवॉर्ड से भी नहीं नवाजा जाता। विदेशी विश्वविद्यालयों से प्राप्त श्री सामंत के अवाॅर्ड इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं कि हम अपने असली समाजसेवकों और भविष्य निर्माताओं की कितनी कद्र करते हैं। सलाम है ऐसे कर्मवीर को और ईश्वर से ये प्रार्थना भी कि वे उ...
छंदबद्ध रचना में मात्राभार की गणना ***************************** छंदबद्ध रचना के लिये मात्राभार की गणना का ज्ञान आवश्यक है। मात्राभार दो प्रकार का होता है– वर्णिक भार और वाचिक भार। वर्णिक भार में प्रत्येक वर्ण का भार अलग-अलग यथावत लिया जाता है जैसे– विकल का वर्णिक भार = 111 या ललल जबकि वाचिक भार में उच्चारण के अनुरूप वर्णों को मिलाकर भार की गणना की जाती है जैसे विकल का उच्चारण वि कल है, विक ल नहीं, इसलिए विकल का वाचिक भार है – 12 या लगा। वर्णिक भार की गणना करने के लिए कुछ निश्चित नियम हैं। वर्णिक भार की गणना (1) ह्रस्व स्वरों की मात्रा 1 होती है जिसे लघु कहते हैं, जैसे - अ, इ, उ, ऋ की मात्रा 1 है। लघु को 1 या । या ल से व्यक्त किया जाता है। (2) दीर्घ स्वरों की मात्रा 2 होती है जिसे गुरु कहते हैं, जैसे-आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ की मात्रा 2 है। गुरु को 2 या S या गा से व्यक्त किया जाता है। (3) व्यंजनों की मात्रा 1 होती है , जैसे -क,ख,ग,घ / च,छ,ज,झ / ट,ठ,ड,ढ,ण / त,थ,द,ध,न / प,फ,ब,भ,म /य,र,ल,व,श,ष,स,ह। वास्तव में व्यंजन का उच्चारण स्वर के साथ ही संभव है, इसलिए उसी रूप में यहाँ लिखा गया है। अन...
Comments
Post a Comment